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त्राटक करते समय 5 परेशानियाँ आती हैं – और इनके आसान समाधान
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त्राटक करते समय 5 परेशानियाँ आती हैं – और इनके आसान समाधान
बहुत से लोग त्राटक शुरू तो कर लेते हैं, पर कुछ दिनों बाद छोड़ देते हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें लगता है कि वे गलत कर रहे हैं। आँखों में जलन, मन का भटकना, सिरदर्द, या कभी कुछ दिखता नहीं – ये सब आम समस्याएँ हैं। पर ये कोई गलती नहीं हैं – ये साधना के शुरुआती पड़ाव हैं। इन्हें समझ लेंगे तो रास्ता आसान हो जाएगा।
समस्या 1 – आँखों में जलन और आँसू आना
यह सबसे आम है। जब आप बिना पलक झपकाए दीपक की लौ देखते हैं, तो आँखें सूखने लगती हैं और जलन होती है।
समाधान: पलकों को जबरदस्ती मत रोको। जब जलन हो, तो धीरे-धीरे पलकें झपकाओ और फिर से देखो। आँसू आना बुरा नहीं है। दीपक की दूरी 60-80 सेमी के आसपास रख सकते हैं और आँखों पर अनावश्यक दबाव न डालें। तेज जलन या दर्द हो तो अभ्यास रोक दें।
- पलकों को जबरन मत रोको – जलन हो तो झपकाओ।
- असुविधा को नजरअंदाज न करें।
- दूरी और रोशनी ऐसी रखें कि आँखों पर अनावश्यक तनाव न हो।
समस्या 2 – मन बहुत भटकता है, एकाग्रता नहीं होती
यह हर किसी के साथ हो सकता है। मन को स्थिर होने की आदत नहीं होती – वह इधर-उधर भागना चाहता है।
समाधान: भटकने से लड़ो मत। जब मन भटके, तो बिना गुस्सा किए उसे वापस लौ की तरफ ले आओ। जितनी बार भटके, उतनी बार वापस लाओ – यही अभ्यास है। एक और आसान तरीका – जप की गति धीमी करो और साँस के साथ जप को जोड़ो। जब साँस और जप एक लय में होंगे, तो मन अपने आप शांत होने लगेगा।
- भटकने से लड़ो मत – बिना गुस्सा किए वापस लाओ।
- जितना भटके – उतना वापस आना – यही अभ्यास है।
- साँस के साथ जप को जोड़ो – मन शांत होगा।
समस्या 3 – कुछ दिखता नहीं, कोई प्रकाश या रंग नज़र नहीं आता
कुछ लोग सोचते हैं – “मुझे तो कुछ दिखता ही नहीं, क्या मैं गलत कर रहा हूँ?”
समाधान: यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को रंग या प्रकाश दिखे। किसी को रंग दिखते हैं, किसी को प्रकाश, और किसी को बस शांति का अहसास होता है। रंग या प्रकाश का न दिखना अपने आप में कोई कमी नहीं है।
- कुछ न दिखे तो घबराओ मत।
- हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है।
- दृष्टि को सहज रखें और अनुभव को लेकर अनावश्यक दबाव न बनाएं।
समस्या 4 – सिरदर्द या भारीपन महसूस होता है
यह भौंहों के बीच ज्यादा जोर लगाने, आँखों पर तनाव या गलत मुद्रा से जुड़ा हो सकता है।
समाधान: आँखों पर दबाव मत डालो। दृष्टि को कोमल रखो – जैसे कोई फूल देख रहे हो। रीढ़ को सीधा रखो। अगर सिरदर्द हो, तो अगले दिन अभ्यास का समय कम कर दो और धीरे-धीरे बढ़ाओ। त्राटक के बाद हथेलियाँ रगड़कर आँखों पर रखना (पाल्मिंग) आराम दे सकता है।
- भौंहों पर दबाव मत डालो – दृष्टि को कोमल रखो।
- रीढ़ सीधी रखो।
- सिरदर्द बना रहे तो अभ्यास रोककर आराम करें।
समस्या 5 – नींद आने लगती है
जब आप शांत बैठते हैं और आँखें स्थिर होती हैं, तो शरीर को आराम का संकेत मिल सकता है।
समाधान: रीढ़ को सीधा रखो और जप को थोड़ा ऊँची आवाज़ में करो। अगर फिर भी नींद आए – तो थोड़ी देर आँखें खोलकर जप करो, फिर बंद करो। त्राटक से पहले हल्की टहल लो या गहरी साँस लो – इससे शरीर जाग सकता है।
- रीढ़ सीधी रखो और जप को स्पष्ट स्वर में करो।
- आँखें खोलकर जप करो – फिर बंद करो।
- त्राटक से पहले हल्की टहल या गहरी साँस मदद कर सकती है।
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