टेलीपैथी ज्ञान-संग्रह
प्रश्न: अनहद नाद क्या है? कैसे पता चलेगा कि भीतर अनाहत ध्वनि जाग रही है?
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उत्तर:
देखिए, जब साधक गहरे जप और ध्यान में उतरता है तो एक समय ऐसा आता है जब बाहर का सारा शोर बंद हो जाता है और भीतर एक सूक्ष्म ध्वनि सुनाई देने लगती है।
इसे ही 'अनहद नाद' कहते हैं। अनहद यानी बिना किसी टकराव के पैदा होने वाली ध्वनि। यह वह संगीत है जो ब्रह्मांड के हृदय में गूँजता है।
- अनहद नाद कोई बाहरी आवाज़ नहीं है
- यह भीतर की सूक्ष्म ध्वनि है जो ध्यान में सुनाई देती है
- इसे 'ब्रह्मांड का संगीत' या 'नाद ब्रह्म' भी कहते हैं
अनहद नाद कैसे सुनाई देता है?
अब सवाल यह है कि यह कैसे सुनाई देता है?
शुरुआत में यह बहुत हल्की 'सां-सां' या 'झंकार' जैसी होती है। फिर धीरे-धीरे यह भंवरे की गूंज, शंख की ध्वनि, वीणा के स्वर और अंत में मेघ गर्जना या ओंकार की अनंत गूँज में बदल जाती है।
- पहले यह कानों में हल्की सी सां-सां जैसी सुनाई देती है
- फिर यह भंवरे, शंख, वीणा या बांसुरी जैसी लगने लगती है
- अंत में यह ओंकार या बादलों की गरज जैसी गूँज बन जाती है
- यह ध्वनि बाहर से नहीं, भीतर से आती है
एक जरूरी सावधानी
लेकिन यहाँ एक सावधानी जरूरी है:
- इस नाद को पाने की जल्दी न करें
- इसे सिद्धि मानकर अहंकार में न आएं
- इससे चिपके नहीं, बस साक्षी बनकर सुनते रहें
- यह भी एक पड़ाव है, मंजिल नहीं
अनहद नाद से शून्य की ओर
जब यह नाद गहरा होता है तो साधक का अस्तित्व गलने लगता है। अब कोई नाम नहीं बचता, कोई रूप नहीं बचता। केवल एक अनंत शांति बचती है और वही शून्य है, वही परमात्मा है।
- अनहद नाद शब्द और शून्य के बीच का पुल है
- इसके बाद जो बचता है, वह पूर्ण मौन है
- यही 'शब्द से शून्य तक' की यात्रा का शिखर है
📖 शब्द से शून्य तक
अब बात करते हैं उस पुस्तक की जो आपकी इस यात्रा को पूरा कर सकती है।
इस विषय को और गहराई से समझने के लिए आप हमारी पुस्तक “शब्द से शून्य तक” पढ़ सकते हैं। इसमें अनहद नाद, शून्यता, आजपा और आत्म-साक्षात्कार तक की पूरी यात्रा है।
पुस्तक में क्या है:
- नाम जप के तीन स्तर—वैखरी, मध्यमा और पश्यंती
- आजपा जप क्या है और कैसे प्राप्त करें
- अनहद नाद और शून्यता का अनुभव
- 21 पड़ाव और साधकों के वास्तविक अनुभव
- 40 दिन का साधना कार्यक्रम
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