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नवग्रह कवच: संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, लाभ और साधना विधि
योग, ध्यान और आध्यात्मिक जीवन के लिए सरल व विश्वसनीय मार्गदर्शन
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🔱 नवग्रह कवच – जो श्रद्धापूर्वक पढ़े, वह ग्रह बाधाओं से शांति की कामना कर सकता है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मकता का अनुभव कर सकता है।
ज्योतिष परंपरा में नवग्रहों को जीवन के अनेक पक्षों—करियर, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, संबंध और मानसिक शांति—से जोड़ा जाता है। नवग्रह कवच को एक प्राचीन स्तोत्र माना जाता है, जिसका पाठ ग्रहों की कृपा, आंतरिक स्थिरता और आध्यात्मिक संरक्षण की भावना से किया जाता है। नीचे इसका संपूर्ण पाठ, सरल हिंदी अर्थ, पारंपरिक लाभ और साधना विधि दी जा रही है।
नवग्रहकवचम्
ब्रह्मोवाच :-
शिरो मे पातु मार्ताण्डो कपालं रोहिणीपतिः ।
मुखमङ्गारकः पातु कण्ठश्च शशिनन्दनः ॥
हिंदी अर्थ – मेरे सिर की रक्षा सूर्य करें, कपाल की चंद्र करें, मुख की मंगल करें और कंठ की बुध रक्षा करें।
बुद्धिं जीवः सदा पातु हृदयं भृगुनन्दनः ।
जठरञ्च शनिः पातु जिह्वां मे दितिनन्दनः ॥
हिंदी अर्थ – बुद्धि की गुरु सदा रक्षा करें, हृदय की शुक्र करें, जठर की शनि करें और जिह्वा की राहु रक्षा करें।
पादौ केतुः सदा पातु वाराः सर्वाङ्गमेव च ।
तिथयोऽष्टौ दिशः पान्तु नक्षत्राणि वपुः सदा ॥
हिंदी अर्थ – दोनों पैरों की केतु रक्षा करें, सभी अंगों की वार रक्षा करें, दिशाओं की तिथियाँ रक्षा करें और समस्त शरीर की नक्षत्र रक्षा करें।
अंसौ राशिः सदा पातु योगाश्च स्थैर्यमेव च ।
गुह्यं लिङ्गं सदा पान्तु सर्वे ग्रहाः शुभप्रदाः ॥
हिंदी अर्थ – कंधों की राशियाँ रक्षा करें, योग स्थिरता प्रदान करें और सभी ग्रह शुभ फल देने वाले होकर गुप्त अंगों की रक्षा करें।
अणिमादीनि सर्वाणि लभते यः पठेद् ध्रुवम् ॥
हिंदी अर्थ – परंपरा के अनुसार, श्रद्धापूर्वक पाठ करने वाला साधक अणिमा आदि सिद्धियों की कामना करता है।
एतां रक्षां पठेद् यस्तु भक्त्या स प्रयतः सुधीः ।
स चिरायुः सुखी पुत्री रणे च विजयी भवेत् ॥
हिंदी अर्थ – जो शुद्ध चित्त और भक्ति से इसका पाठ करता है, उसके लिए दीर्घायु, सुख, संतान और विजय की प्रार्थना की गई है।
अपुत्रो लभते पुत्रं धनार्थी धनमाप्नुयात् ।
दारार्थी लभते भार्यां सुरूपां सुमनोहराम् ॥
हिंदी अर्थ – इस श्लोक में संतान, धन और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना की गई है।
रोगी रोगात्प्रमुच्येत बद्धो मुच्येत बन्धनात् ।
जले स्थले चान्तरिक्षे कारागारे विशेषतः ॥
हिंदी अर्थ – रोग, भय और बंधनों से मुक्ति की प्रार्थना की गई है। स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सकीय उपचार आवश्यक है; स्तोत्र पाठ आध्यात्मिक सहारा हो सकता है।
यः करे धारयेन्नित्यं भयं तस्य न विद्यते ।
ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयं गुर्वङ्गनागमः ।
सर्वपापैः प्रमुच्येत कवचस्य च धारणात् ॥
हिंदी अर्थ – कवच धारण को भय से रक्षा और प्रायश्चित्त की भावना से जोड़ा गया है। इसे किसी भी कर्म के कानूनी या नैतिक परिणाम से बचने का साधन नहीं मानना चाहिए।
नारी वामभुजे धृत्वा सुखैश्वर्यसमन्विता ।
काकवन्ध्या जन्मवन्ध्या मृतवत्सा च या भवेत् ।
बह्वपत्या जीववत्सा कवचस्य प्रसादतः ॥
हिंदी अर्थ – इस श्लोक में स्त्री के सुख, ऐश्वर्य और संतान-सुख की कामना की गई है। प्रजनन या गर्भावस्था से जुड़ी समस्या में योग्य चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।
नवग्रह कवच के पारंपरिक लाभ
ज्योतिष और साधना परंपरा में इसके नियमित पाठ को ग्रह शांति, मानसिक स्थिरता, भय में कमी, आत्मविश्वास, आर्थिक अनुशासन, पारिवारिक सामंजस्य और आध्यात्मिक संरक्षण की भावना से जोड़ा जाता है। यह परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा, कर्म, परिस्थिति और व्यवहार पर निर्भर हो सकते हैं।
साधना विधि
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शांत स्थान पर बैठें। सामने दीपक, जल और पुष्प रख सकते हैं। कुछ समय शांत श्वास लें, फिर अपनी परंपरा के अनुसार नवग्रहों का स्मरण करके कवच का एक बार पाठ करें। नियमितता के लिए 21 दिनों तक प्रतिदिन एक समय चुनना उपयोगी हो सकता है। किसी विशेष ग्रह की उपासना करते समय प्रमाणित गुरु या योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना बेहतर है।
सावधानी
यह सामग्री धार्मिक और पारंपरिक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इसे चिकित्सा, कानूनी, वित्तीय या निश्चित फल की गारंटी न समझें। हम किसी व्यक्ति को निजी संदेश भेजकर पैसे नहीं मांगते।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवग्रह कवच कब पढ़ना चाहिए?
प्रातःकाल या संध्या समय शांत मन से पढ़ना सुविधाजनक माना जाता है।
क्या इसे रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ, श्रद्धा और नियमितता के साथ रोज एक बार पाठ किया जा सकता है।
क्या पाठ से सभी समस्याएँ तुरंत समाप्त हो जाती हैं?
ऐसी निश्चित गारंटी नहीं दी जा सकती। पाठ आध्यात्मिक अनुशासन और मानसिक सहारा दे सकता है, जबकि व्यावहारिक समस्याओं के लिए उचित कार्रवाई भी आवश्यक है।
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