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शाबर मंत्र — पूजा का फल न मिलने वालों के लिए विशेष उपाय
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शाबर मंत्र — पूजा का फल न मिलने वालों के लिए विशेष उपाय
मंत्र 📌
शंकर कहें पार्वती से
निगुरा करे जाप
देवूँ वाको मैं पाप
गौरा कहै महादेव पूत जान करो
दया देवो सफलता का वरदान
दुहाई भक्त नन्दी ब्रह्मचारी की ।।
यह एक प्राचीन शाबर मंत्र है। यह मंत्र खास उन लोगों के लिए माना गया है जो वर्षों से पूजा, जप, व्रत तो करते हैं लेकिन उन्हें वैसा फल अनुभव नहीं होता जैसा होना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि हम नियम से पूजा करते हैं, पर मन में यह सवाल रह जाता है कि “मेरी पूजा असर क्यों नहीं कर रही?” — यह मंत्र उसी रुकावट को तोड़ने के लिए बताया गया है।
इस मंत्र का भाव यह है कि स्वयं भगवान शिव, माता पार्वती से कह रहे हैं कि जो साधक बिना दिखावे, बिना छल के जाप करता है, उसकी पूजा का फल मैं स्वयं सुनिश्चित करूँगा। इसमें नंदी और ब्रह्मचारी की दुहाई दी गई है, यानी यह मंत्र पूजा की सिद्धि से सीधा जुड़ा हुआ है।
पूजा से पहले प्रयोग (फल को सक्रिय करने के लिए)
जब भी आप किसी भी देवी-देवता की पूजा में बैठें, उससे पहले इस मंत्र का 21 बार शांत मन से पाठ कर लें। इससे पूजा का “कनेक्शन” बनता है और साधक का भाव स्थिर होता है। बहुत से लोगों का अनुभव है कि इसके बाद की गई पूजा ज्यादा गहरी लगने लगती है।
मंत्र सिद्धि की विधि (शक्ति जागरण के लिए)
यदि आप इस मंत्र को सिद्ध करना चाहते हैं, तो यह साधना शिव मंदिर में करना सबसे उपयुक्त माना गया है।
- प्रतिदिन दिया जलाकर इस मंत्र की 2 माला जाप करें।
- जाप के समय भगवान शिव और माता पार्वती को गुड़ का भोग अर्पित करें और साथ में दही का भोग भी रखें।
- जाप के लिए प्राण-प्रतिष्ठित रुद्राक्ष माला का ही प्रयोग करें।
- साधना शुरू करने से पहले एक बार गोरख चालीसा अवश्य पढ़ें, क्योंकि यह मंत्र नाथ परंपरा से जुड़ा माना जाता है।
इस प्रकार प्रतिदिन नियम से जाप करें और अंतिम दिन हवन कर दें। हवन के बाद इस मंत्र को सिद्ध माना जाता है।
सिद्धि के बाद प्रभाव
साधना पूर्ण होने के बाद, जब भी आप इस मंत्र का जाप करके पूजा में बैठेंगे, तो धीरे-धीरे आपको अपनी पूजा का प्रभाव महसूस होने लगेगा। मन जल्दी एकाग्र होगा, भटकाव कम होगा और पूजा “रूटीन” नहीं बल्कि अनुभव बनने लगेगी।
यह मंत्र दिखावे या चमत्कार के लिए नहीं, बल्कि पूजा के फल को खोलने के लिए माना गया है।
ये मंत्र गुरु शिष्य परम्परा के अंतर्गत आते हैं, अतः निवेदन है कि कुपात्र को ना दें, जिसके पास पहुंच जाये फिर उसका भाग्य।
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