टेलीपैथी ज्ञान-संग्रह
प्रश्न: क्या घर-परिवार और नौकरी के बीच रहकर भी योगी बना जा सकता है?
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देखिए, अक्सर लोग सोचते हैं कि साधना के लिए हिमालय जाना पड़ता है या संसार छोड़ना पड़ता है। लेकिन सच्चाई यह है कि असली योगी वह है जो बाजार के शोर में भी अपनी शांति नहीं खोता।
असली साधना पूजा-घर तक सीमित नहीं होती। वह आपके हर काम में, हर रिश्ते में, हर जिम्मेदारी में झलकनी चाहिए। जब आप नाम को अपने दैनिक जीवन से जोड़ देते हैं तो हर काम पूजा बन जाता है।
- योगी वह नहीं जो दुनिया से भाग जाए
- योगी वह है जो दुनिया में रहते हुए भी भीतर शांत रहे
- नाम जप को जीवन के हर काम से जोड़िए
- तब काम बोझ नहीं, सेवा बन जाएगा
अब सवाल यह है कि ऐसा कैसे करें?
सबसे पहले, नाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। जब आप नहा रहे हों, चाय पी रहे हों, या सफर कर रहे हों तो नाम को भीतर एक धीमी गुनगुनाहट की तरह चलने दीजिए। जबरदस्ती एकाग्र होने की जरूरत नहीं। बस नाम को बैकग्राउंड में बहने दीजिए।
- नहाते, खाते, चलते-फिरते नाम चलता रहे
- ट्रैफिक जाम या इंतजार को बोनस जप मानें
- हर नए काम से पहले एक गहरी साँस लें और नाम दोहराएं
- काम करते हुए भी भीतर नाम गूँजता रहे
रिश्तों को साधना का हिस्सा बनाइए
अक्सर हमें लगता है कि परिवार साधना में बाधा है। लेकिन यदि आप भगवत् सानिध्य को समझ चुके हैं, तो आप जानेंगे कि परिवार की सेवा करना साक्षात् परमात्मा की सेवा है।
- माता-पिता, पत्नी, बच्चों की सेवा करें
- इसे बंधन न मानें, इसे सेवा का अवसर मानें
- जब ऑफिस जाएं तो सोचें कि आप उसके संसार को चला रहे हैं
- दृष्टिकोण बदलते ही तनाव कम करने में मदद मिल सकती है
कठिन समय में नाम का सहारा लें
जब कोई अपमान करे या आर्थिक तंगी आए, तो उस समय नाम को अपना ढाल बनाएं। नाम आपको उस स्थिति से जोड़ देगा, पर भीतर घर नहीं करने देगा। आप समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन समस्या आपको विचलित नहीं करेगी।
- विपरीत परिस्थितियों में नाम का सहारा लें
- नाम आपको डिटैच रहने में मदद कर सकता है
- आप दुनिया में रहेंगे, पर दुनिया आपमें नहीं
- यही सच्चा योग है
याद रखिए, कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि मन में नाम है तो एक कसाई भी योगी हो सकता है और यदि मन में अहंकार है तो एक संन्यासी भी अज्ञानी है। आपकी नौकरी, आपका व्यापार, आपका परिवार—यह सब आपकी साधना का हिस्सा है, बाधा नहीं।
- हर काम को नाम से रंग दें
- हर रिश्ते को सेवा भाव से निभाएं
- हर परिस्थिति को उसकी इच्छा मानें
- तब आप संसार में रहकर भी संन्यासी बन जाएंगे
आज से ही शुरुआत करें
क्या आप बाजार की भीड़ में खड़े होकर अपने भीतर के संन्यासी को जीवित रखना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आज से ही नाम को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिए।
📖 शब्द से शून्य तक
इस विषय को और गहराई से समझने के लिए आप हमारी पुस्तक “शब्द से शून्य तक” पढ़ सकते हैं। इसमें जीवन में नाम, कर्म योग, भगवत् सानिध्य और आत्म-साक्षात्कार तक की पूरी यात्रा है।
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पुस्तक में क्या है
- नाम जप के तीन स्तर—वैखरी, मध्यमा और पश्यंती
- आजपा जप क्या है और कैसे प्राप्त करें
- अनहद नाद और शून्यता का अनुभव
- भगवत् सानिध्य और हर कण में ईश्वर का अनुभव
- जीवन में नाम: काम, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच योगी कैसे बनें
- 21 पड़ाव और साधकों के वास्तविक अनुभव
- 40 दिन का साधना कार्यक्रम
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